January 23, 2007
पुस्तक समर्पण
प्रकाशकीय
प्राक्कथन : दादा धर्माधिकारी
लेखक के दो शब्द
मंगल मन्दिर खोलो !
प्रभात किरणें
पूरे प्रेमीजन रे
हर्ष शोक का बँटवारा
स्नेह और अनुशासन
१९३० – ३२ की धूप – छाँह
नयी तालीम का जन्म
बापू की प्रयोगशाला
यज्ञसंभवा मूर्ति
अग्निकुण्ड में खिला गुलाब
वह अपूर्व अवसर
मोहन और महादेव
भणसाळीकाका
मैसूर और राजकोट
मेरे लिए एक स्वामी बस है !
परपीड़ा
बा
दूसरा विश्व-युद्ध और व्यक्तिगत सत्याग्रह
आक्रमण का अहिंसक प्रतिकार
जमनालालजी
९ अगस्त , १९४२
अग्नि – परीक्षा
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‘बापू की गोद में’ का पुस्तक रूप में प्रकाशन – एक उत्तम काम हुआ।
आज आपके लिंक के जरिये यहां पहुंचा. आपने अति उत्तम काम किया है. अब इसे पीडीएफ प्रारूप में भी प्रस्तुत करें तो अच्छा हो
बहुत ही सराहनीय प्रयास आपका. आश्वस्त हुआ कि मेरे साथ और भी शामिल हैं इस प्रयास में. शुभकामनाएं.
(gandhivichar.blogspot.com)
साल की सबसे अंधेरी रात में दीप इक जलता हुआ बस हाथ में लेकर चलें करने धरा ज्योतिर्मयी
कड़वाहटों को छोड़ कर पीछे कहीं अपना-पराया भूल कर झगडे सभी झटकें सभी तकरार ज्यों आयी-गयी
★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★ दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ! ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
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January 24, 2007 at 10:17 am
‘बापू की गोद में’ का पुस्तक रूप में प्रकाशन – एक उत्तम काम हुआ।
July 23, 2008 at 6:58 am
आज आपके लिंक के जरिये यहां पहुंचा.
आपने अति उत्तम काम किया है.
अब इसे पीडीएफ प्रारूप में भी प्रस्तुत करें तो अच्छा हो
February 18, 2009 at 12:28 pm
बहुत ही सराहनीय प्रयास आपका. आश्वस्त हुआ कि मेरे साथ और भी शामिल हैं इस प्रयास में. शुभकामनाएं.
(gandhivichar.blogspot.com)
October 17, 2009 at 4:21 am
साल की सबसे अंधेरी रात में
दीप इक जलता हुआ बस हाथ में
लेकर चलें करने धरा ज्योतिर्मयी
कड़वाहटों को छोड़ कर पीछे कहीं
अपना-पराया भूल कर झगडे सभी
झटकें सभी तकरार ज्यों आयी-गयी
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दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
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