बापू की गोद में

पुस्तक समर्पण

प्रकाशकीय

प्राक्कथन : दादा धर्माधिकारी

लेखक के दो शब्द

मंगल मन्दिर खोलो !

प्रभात किरणें

पूरे प्रेमीजन रे

हर्ष शोक का बँटवारा

स्नेह और अनुशासन

१९३० – ३२ की धूप – छाँह

नयी तालीम का जन्म

बापू की प्रयोगशाला

यज्ञसंभवा मूर्ति

अग्निकुण्ड में खिला गुलाब

वह अपूर्व अवसर

मोहन और महादेव

भणसाळीकाका

मैसूर और राजकोट

मेरे लिए एक स्वामी बस है !

परपीड़ा

बा

दूसरा विश्व-युद्ध और व्यक्तिगत सत्याग्रह

आक्रमण का अहिंसक प्रतिकार

जमनालालजी

९ अगस्त , १९४२

अग्नि – परीक्षा

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बापू की गोद में” पर 5 विचार

  1. साल की सबसे अंधेरी रात में
    दीप इक जलता हुआ बस हाथ में
    लेकर चलें करने धरा ज्योतिर्मयी

    कड़वाहटों को छोड़ कर पीछे कहीं
    अपना-पराया भूल कर झगडे सभी
    झटकें सभी तकरार ज्यों आयी-गयी

    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★

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